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| Last Updated:09/01/2014

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पेयजल, सफाई के लिए विश्व बैंक करेगा मदद

दैनिक भास्कर, 8 जनवरी 2014

 

 

सरोकार : असम, बिहार, झारखंड, यूपी के लिए 50 करोड़ डॉलर का लोन

 

16.7 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से सिर्फ 31 फीसदी को टैप वाटर आपूर्ति और घर में ही शौचालय सुविधा हासिल है

 

देश के असम, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश राज्य के ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता की परियोजनाओं के लिए विश्व बैंक 50 करोड़ डॉलर की कर्ज सहायता देगा। विश्व बैंक द्वारा बिना ब्याज के दिया जाने वाला यह कर्ज 25 साल के लिए होगा और पांच साल के लिए ग्रेस पीरियड भी मिलेगा।

 

विश्व बैंक ने एक बयान में बताया है, 'विश्व बैंक ने कम आय वाले राज्यों में पाइप के द्वारा ग्रामीण पेयजल आपूर्ति और सफाई व्यवस्था में सुधार की परियोजनाओं (आरडब्ल्यूएसएस) को 50 करोड़ डॉलर की कर्ज सहायता देना मंजूर किया है।

 

इन परियोजनाओं के तहत भारतीय राज्यों, असम, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में विकेंद्रीकृत आपूर्ति प्रणाली के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और सफाई व्यवस्था में सुधार करना है। ' यह परियोजनाएं छह साल के दौरान लागू किया जाएगा।

 

इससे कम आय वाले राज्यों में समर्पित आरडब्ल्यूएसएस कार्यक्रम को तैयार करने और उसे लागू करने में मदद मिलेगी। यह कार्यक्रम फिलहाल चल रहे राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम इन परियोजनाओं के तहत ही होंगे। परियोजना के पहले चरण में असम, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के 33 जिलों को शामिल किया जाएगा।

 

इन राज्यों में पाइप से पेयजल आपूर्ति का सबसे कम कवरेज है। बिहार में यह कवरेज 2.6 फीसदी, झारखंड में 3.7 फीसदी, असम में 6.8 फीसदी और उत्तर प्रदेश में 20.2 फीसदी है। वल्र्ड बैंक का कहना है कि, 'बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश स्वच्छता के मामले में भी काफी पीछे हैं। इन राज्यों के करीब 75 फीसदी ग्रामीण परिवारों के मकानों में शौचालय नहीं हैं। इस प्रोजेक्ट से इन राज्यों के करीब 78 लाख ग्रामीण लोगों को सीध फायदा होगा।

 

' विश्व बैंक का कहना है कि भारत के 16.7 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से सिर्फ 31 फीसदी की ही पाइप्ड पेयजल और घर में शौचालय तक पहुंच है (वर्ष2011 के जनगणना के मुताबिक)। भारत की करीब 67 फीसदी जनसंख्या खुले में शौच करने जाती है और दुनिया में खुले में शौच करने वालों में से आधा हिस्सा भारत में होता है।

 

विश्व बैंक के भारत के लिए कंट्री डायरेक्टर ओन्नो रुहल ने कहा, 'करीब 38 लाख महिलाओं को हर दिन पानी आपूर्ति का बोझ उठाना पड़ता है। इन परियोजनाओं से महिलाओं का पानी जुटाने में लगने वाला समय कम होगा, इस बचे हुए समय का इस्तेमाल वे दूसरे रचनात्मक कार्यों में कर सकती हैं। '


Source: business.bhaskar.com/article/BIZ-ART-drinking-water-sanitation-will-help-the-world-bank-4487197-NOR.html